हल्द्वानी में ‘कुमाऊं द्वार महोत्सव’ में शामिल हुए सीएम धामी, बोले— देवभूमि की अस्मिता की रक्षा सरकार का संकल्प

लोक संस्कृति के संरक्षण से लेकर युवाओं के भविष्य तक, हर मोर्चे पर काम कर रही सरकार

हल्द्वानी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रविवार को हल्द्वानी में आयोजित ‘कुमाऊं द्वार महोत्सव’ में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन पर जोर देते हुए कहा कि सांस्कृतिक आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मुख्यमंत्री ने महोत्सव के आयोजक वैदेही कल्चरल एजुकेशन एंड आर्ट फाउंडेशन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि लोकगीत और लोकनृत्य उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान के अभिन्न अंग हैं। छोलिया, झोड़ा, चांचरी और न्योली जैसी लोक विधाएं प्रदेश की समृद्ध विरासत को संजोए हुए हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों के जरिए उत्तराखंड का लोक संगीत देश-विदेश में पहचान बना रहा है और युवाओं की बढ़ती रुचि इस दिशा में सकारात्मक संकेत है।

देवभूमि की अस्मिता की रक्षा सरकार की प्राथमिकता

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड केवल एक भौगोलिक प्रदेश नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है। देवभूमि की अस्मिता की रक्षा करना सरकार के लिए केवल राजनीतिक विषय नहीं, बल्कि संकल्प है।

उन्होंने समान नागरिक संहिता, सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगारोधी कानून और सशक्त भू-कानून की दिशा में उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश के हितों की रक्षा और सरकारी भूमि से अवैध कब्जे हटाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

पांच साल में 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को रोजगार के उचित अवसर उपलब्ध कराने और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। उन्होंने दावा किया कि पिछले पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी एवं निष्पक्ष चयन प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी नौकरी प्रदान की गई है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश का हित सत्ता से, जनहित राजनीति से और राष्ट्रहित वोटबैंक की राजनीति से ऊपर है। सरकार उत्तराखंड के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए आवश्यक फैसले लेने से पीछे नहीं हटेगी।

उत्तराखंड के लोगों पर टिप्पणी को लेकर जताई आपत्ति

मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड के लोगों को घुसपैठिया कहे जाने संबंधी टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए प्रदेश के स्वाभिमान और सम्मान का मुद्दा उठाया। राज्य आंदोलन के दौरान हुए रामपुर तिराहा गोलीकांड और आंदोलनकारियों के संघर्ष का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लोगों ने राज्य निर्माण के लिए बड़ा संघर्ष और बलिदान दिया है। ऐसे में प्रदेशवासियों के सम्मान से जुड़ी टिप्पणियां संवेदनशील विषय हैं।

उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और देश के सम्मान से जुड़े विषयों पर राजनीतिक बयान देते समय राष्ट्रहित और सार्वजनिक जीवन की मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए।

अंकिता भंडारी प्रकरण में न्याय सर्वोपरि

मुख्यमंत्री ने अंकिता भंडारी प्रकरण पर कहा कि किसी बेटी को न्याय दिलाना समाज और व्यवस्था की गंभीर जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर दिया कि इस संवेदनशील मामले में तथ्यों, प्रमाणों और न्यायिक प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि बहन अंकिता को न्याय मिलना सर्वोपरि है। संवेदनशील मामलों को राजनीतिक लाभ का माध्यम बनाने के बजाय तथ्यों के आधार पर संवाद किया जाना चाहिए और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान किया जाना चाहिए।

अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का संकल्प

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य विकास का लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाना है। सरकार युवाओं को अवसर देने, महिलाओं को सशक्त बनाने और प्रत्येक परिवार के जीवन में खुशहाली लाने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदेश की जनता के सहयोग और विश्वास से उत्तराखंड सांस्कृतिक संरक्षण, विकास और जनकल्याण के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ता रहेगा।

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